sar uthaane ki to himmat nahin karne waale | सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले

  - Nadim Nadeem

सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले
ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले

मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है
हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले

इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले

हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग
ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले
'इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें
हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले

फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे
हम तिरे शहरस हिजरत नहीं करने वाले

  - Nadim Nadeem

Berozgari Shayari

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