choo sukoon tujh ko ye auqaat kabhi to hogii | छू सुकूँ तुझ को ये औक़ात कभी तो होगी

  - Nadim Nadeem

छू सुकूँ तुझ को ये औक़ात कभी तो होगी
और मुयस्सर भी तिरी ज़ात कभी तो होगी

चाँद के साथ में जो छत पे कभी गुज़रेगी
साथ तुम और वो हसीं रात कभी तो होगी

एक मुद्दत से यही आस लिए बैठा हूँ
तुझ में भी शिद्दत-ए-जज़्बात कभी तो होगी

हिज्र-ए-जानाँ में भी आँसू नहीं आए मेरे
ख़ुश्क सहराओं में बरसात कभी तो होगी

जुगनुओं का तो कोई काम उजालों में नहीं
इन से रौशन शब-ए-ज़ुल्मात कभी तो होगी

इस लिए ख़त्म कहानी नहीं होने देता
उस के क़िस्से में मिरी बात कभी तो होगी

  - Nadim Nadeem

Sukoon Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nadim Nadeem

As you were reading Shayari by Nadim Nadeem

Similar Writers

our suggestion based on Nadim Nadeem

Similar Moods

As you were reading Sukoon Shayari Shayari