मुहीब जंगल में पहले तो इस तरह किसी झोंपड़ी का होना

फिर उस से उठते धुएँ ने बावर कराया हम को किसी का होना

मुहाफ़िज़ों की नज़र से बचकर उबूर करना है उस गली को
और इस
में गम्भीर मसअला है जगह-जगह रौशनी का होना

शिकारियों ने सुकून जंगल का सारा बर्बाद कर दिया है
बहुत ज़रूरी है टारज़न की किसी तरह वापसी का होना

मुक़र्रिरा वक़्त पूरा होने से पहले उठकर वो जाने लगता
विसाल के रोज़ो-शब बहुत मेरे काम आया घड़ी का होना

कहीं भी करतब दिखाना पड़ जाए हम को मुमकिन है अपने फ़न का
हम ऐसे जादूगरों के हाथों में लाज़मी है छड़ी का होना

ज़रा सी ग़फ़लत से ये न हो रायगाँ चली जाए सारी मेहनत
शिकार करने से तुम यक़ीनी बनाओ पहले छुरी का होना

मैं ऐसे माली के हाथ सौपूँगा बाग़ दिल का जिसे पता हो
शजर की नश्वो-नुमा में बेहतर रहेगा कितनी नमी का होना

— Nadir Ariz

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