हुस्न मंज़र में कहाँ है
ये हमारे मन की आँखों में कहीं है
मन की आँखें खुल सकें जो
तो हर इक मंज़र हसीं है
हुस्न मंज़र में नहीं है
— Naeem Zarrar Ahmad
ये हमारे मन की आँखों में कहीं है
मन की आँखें खुल सकें जो
तो हर इक मंज़र हसीं है
हुस्न मंज़र में नहीं है
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