एक नई बीमारी है बीमारों में
ईंट नई लगवा दी है दीवारों में
इनको भी ले जाओ दरिया में डालो
आग नहीं बाक़ी है इन अंगारों में
कोई कैसे हाल कहे उस बच्चे का
जिस ने बचपन भर बेचा गुब्बारों में
फ़्लैट में जा कर बसने वाले बेचारे
पेड़ लगाए बैठे हैं ओसारों में
मौत भी इनको गले लगाए बैठी है
देखा भी है क्या क़िस्मत के मारों में
ग़ुर्बत में भी तो चेहरों पे रौनक़ है
ऐसा भी क्या ख़ास है इन बेचारों में
— nakul kumar















