हमें सब पता है हक़ीक़त है क्या
किसे किस की कितनी ज़रूरत है क्या
यहाँ लोग आ कर चले जाते हैं
मिरा दिल भी कोई इक़ामत है क्या
मिली बे-वफ़ाई ये चौथी दफ़ा
मुझे मत बताओ मुहब्बत है क्या
वो इक बात मुझ को पता अब चली
बता दूँ सभी को इजाज़त है क्या
रफ़ीक़ों से जाना है क्या दुश्मनी
बताते हैं दुश्मन रफ़ाक़त है क्या
ज़रा ख़ुद को अपने मुक़ाबिल करो
बताएँगे तुम को बग़ावत है क्या
— nakul kumar















