कई क़िस्से अधूरे रह गए अपनी कहानी मेंचले आए हैं बचपन को गँवा के नौजवानी मेंहवाएँ जो बग़ावत पर उतर आई हैं आख़िर मेंकिसी तूफ़ान की दस्तक है मेरी ज़िंदगानी में— nakul kumar