
मुझ को रोने से रोका तो आँखों में मर जाऍंगे
मैं अपने अश्कों के संग इंसाफ़ नहीं कर पाऊँगा
मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा गहमी है
एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
— nakul kumar
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