एक चेहरा मिरा दर्द-ए-दिल बन गया ठीक था आदमी मुज़्महिल बन गयाइत्तिफ़ाक़न मैं गुज़रा था इक कूचे सेफिर गुज़रना ही वो मुस्तक़िल बन गया— Nakul kumar