पलट कर देख लेना जब सदा दिल की सुनाई दे
मेरी आवाज़ में शायद मेरा चेहरा दिख़ाई दे
मुहब्बत रौशनी का एक लमहा है मगर चुप है
किसे शम-ए-तमन्ना दे किसे दाग़-ए-जुदाई दे
चुभें आँखों में भी और रुह में भी दर्द की किरचें
मेरा दिल इस तरह तोड़ो के आईना बधाई दे
खनक उठें न पलकों पर कहीं जलते हुए आँसू
तुम इतना याद मत आओ के सन्नाटा दुहाई दे
रहेगा बन के बीनाई वो मुरझाई सी आँखों में
जो बूढ़े बाप के हाथों में मेहनत की कमाई दे
मेरे दामन को बुसअत दी है तू ने दश्त-ओ-दरिया की
मैं ख़ुश हूँ देने वाले, तू मुझे कतरा के राई दे
किसी को मख़मली बिस्तर पे भी मुश्किल से नींद आए
किसी को नक़्श दिल का चैन टूटी चारपाई दे















