zahar deta hai koi koi davaa deta hai | ज़हर देता है कोई कोई दवा देता है

  - Naqsh Lyallpuri

ज़हर देता है कोई कोई दवा देता है
जो भी मिलता है मिरा दर्द बढ़ा देता है

किसी हमदम का सर-ए-शाम ख़याल आ जाना
नींद जलती हुई आँखों की उड़ा देता है

प्यास इतनी है मेरी रूह की गहराई में
अश्क गिरता है तो दामन को जला देता है

किस ने माज़ी के दरीचों से पुकारा है मुझे
कौन भूली हुई राहों से सदा देता है

वक़्त ही दर्द के काँटों पे सुलाये दिल को
वक़्त ही दर्द का एहसास मिटा देता है

'नक़्श' रोने से तसल्ली कभी हो जाती थी
अब तबस्सुम मिरे होंटों को जला देता है

  - Naqsh Lyallpuri

Dard Shayari

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