मिलना था जिस को प्यार वो लड़का नहीं था मैं
इतनी सी बात थी जिसे समझा नहीं था मैं
शबनम बता रही है कि रोया है आसमाँ
कल रात रोने वालों में तन्हा नहीं था मैं
ये कैसे सोच सकते हो लाऊॅंगा बीच से
वक़्फ़ा लिया था राह से भटका नहीं था मैं
जाने से तेरे मेरी ग़लतफ़हमी तो मिटी
दुनिया में तेरे था तेरी दुनिया नहीं था मैं
— Naved sahil















