वस्ल-ए-दूरी क्यूँँ करते हो
है मजबूरी? क्यूँ करते हो
खोले बाल ये कॉलिज आना
है कमज़ोरी क्यूँ करते हो
ग़ुस्से में वो ये बोली मुझ से
सुन ओ छोरी क्यूँ करते हो
बेआशिक हो रहो ना वैसे
सुख से दूरी क्यूँ करते हो
कुछ तो बात हुई है साहिल
बात अधूरी क्यूँ करते हो
— Naved sahil















