वस्ल-ए-दूरी क्यूँँ करते हो
है मजबूरी? क्यूँँ करते हो
खोले बाल ये कॉलिज आना
है कमज़ोरी क्यूँँ करते हो
ग़ुस्से में वो ये बोली मुझ सेे
सुन ओ छोरी क्यूँँ करते हो
बेआशिक हो रहो ना वैसे
सुख से दूरी क्यूँँ करते हो
कुछ तो बात हुई है साहिल
बात अधूरी क्यूँँ करते हो
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