अपनी पलकों में यूँँ बिठा बैठें
दिल की दुनिया ही अब बना बैठें
दिल से गर हम से दोस्ती रक्खो
सारी दुनिया को हम भुला बैठें
फ़ासले दिल से मिट ही जाएँगे
दूरियाँ मन से गर मिटा बैठें
अब तो हर ज़िक्र में हैं वो शामिल
होश ख़ुद के न यूँ गँवा बैठें
मुझ को हद में संभाले तुम रक्खो
हार कर दिल को जो लगा बैठें
— Naviii dar b dar















