भला कितने भी वो नादान दिखते हैं
यूँ तो हर बात से अनजान दिखते हैं
कही जो उन से दिल की बात जब हम ने
वो क्यूँ उस पर भी अब हैरान दिखते हैं
लगाकर देखे कोई दिल को भी यूँ तो
ये आशिक़ हर तरफ़ इंसान दिखते हैं
हैं हम भी यूँ तो क़ाएल बातों के उन के
हमें भी अब जहाँ के सान दिखते हैं
नवी मक़बूलियत भी अब कहाँ अपनी
हम अपने शहर में अनजान दिखते हैं
— Naviii dar b dar















