इक वो ऐसा भी हम-सफ़र मिला नहीं
दिल में रहने का तो हुनर मिला नहीं
ग़म ही तो था जो भी मिला मुझे यहाँ
चाहा जो भी था चाहकर मिला नहीं
ढूँढ़ता ही रहा वो शख़्स आज भी
मुझ सा भी कोई इस क़दर मिला नहीं
सब यहाँ रहते हैं हर एक दिल में ही
दुख तो ये है मुझे बसर मिला नहीं
राहें अब तो नवी यूँ तन्हा कट चुकी
उस के दिल का मुझे तो घर मिला नहीं
— Naviii dar b dar















