हर शख़्स की निय्यत को यहाँ ढूँढ़ रहा हूँ
मैं बात की औसत को यहाँ ढूँढ़ रहा हूँ
है आदमी क्यूँ आदमी का अब यहाँ दुश्मन
उस खोई 'अक़ीदत को यहाँ ढूँढ़ रहा हूँ
जो हो रहा है मुल्क में ये नफ़रतों का दौर
मैं दिल से भी अज़्मत को यहाँ ढूँढ़ रहा हूँ
— Naviii dar b dar















