उम्मीद को इम्कान माना जाएगा
यूँ दर्द को मेहरान माना जाएगा
जब राह मंज़िल की बहुत हो दूर तो
उस राह को अंजान माना जाएगा
ठोकर को सीने से लगाए बैठा हो
तब हार को आसान माना जाएगा
इस इश्क़ में मुझ को मिला है क्या से क्या
क्या प्यार को नुक़सान माना जाएगा
सैलाब है सीने में यूँ रक्खा हुआ
ख़ामोशी को तूफ़ान माना जाएगा
— Naviii dar b dar















