
यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी तर्बियत रखते हैं कुछ
रौशन हो के भी अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ
हैं जानते क़द्र इंसा की दिल से होती यहाँ पर
बस इस लिए अब भी दिल में इंसानियत रखते हैं कुछ
— Naviii dar b dar
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling