talash kar na zameen aasmaan se baahar | तलाश कर न ज़मीं आसमान से बाहर

  - Nida Fazli

तलाश कर न ज़मीं आसमान से बाहर
नहीं है राह कोई इस मकान से बाहर

बस एक दो ही क़दम और थे सफ़र वाले
थकान देख न पाई थकान से बाहर

निसाब दर्जा-ब-दर्जा यूँँ ही बदलता है
हुआ न कोई भी इस इम्तिहान से बाहर

उसी की जुस्तुजू अक्सर उदास करती है
वो इक जहाँ जो है हर जहान से बाहर

नमाज़ियों से कहो देखें चाँद-सूरज को
निकल रहे हैं मुअज़्ज़िन अज़ान से बाहर

  - Nida Fazli

Falak Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nida Fazli

As you were reading Shayari by Nida Fazli

Similar Writers

our suggestion based on Nida Fazli

Similar Moods

As you were reading Falak Shayari Shayari