tu qareeb aa.e to qurbat ka yuñ izhaar karoon | तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँँ इज़हार करूँँ

  - Nida Fazli

तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँँ इज़हार करूँँ
आइना सामने रख कर तिरा दीदार करूँँ

सामने तेरे करूँँ हार का अपनी एलान
और अकेले में तिरी जीत से इंकार करूँँ

पहले सोचूँ उसे फिर उस की बनाऊँ तस्वीर
और फिर उस में ही पैदा दर-ओ-दीवार करूँँ

मिरे क़ब्ज़े में न मिट्टी है न बादल न हवा
फिर भी चाहत है कि हर शाख़ समर-बार करूँँ

सुब्ह होते ही उभर आती है सालिम हो कर
वही दीवार जिसे रोज़ मैं मिस्मार करूँँ

  - Nida Fazli

Pollution Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nida Fazli

As you were reading Shayari by Nida Fazli

Similar Writers

our suggestion based on Nida Fazli

Similar Moods

As you were reading Pollution Shayari Shayari