tu qareeb aaye to qurbat ka yun izhaar karoon | तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ

  - Nida Fazli

तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ
आइना सामने रख कर तिरा दीदार करूँ

सामने तेरे करूँ हार का अपनी एलान
और अकेले में तिरी जीत से इंकार करूँ

पहले सोचूँ उसे फिर उस की बनाऊँ तस्वीर
और फिर उस में ही पैदा दर-ओ-दीवार करूँ

मिरे क़ब्ज़े में न मिट्टी है न बादल न हवा
फिर भी चाहत है कि हर शाख़ समर-बार करूँ

सुब्ह होते ही उभर आती है सालिम हो कर
वही दीवार जिसे रोज़ मैं मिस्मार करूँ

  - Nida Fazli

Sad Shayari

Our suggestion based on your choice

    क्या दुख है समंदर को बता भी नहीं सकता
    आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

    तू छोड़ रहा है तो ख़ता इसमें तेरी क्या
    हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता
    Read Full
    Waseem Barelvi
    42 Likes
    ज़िंदगी इक फ़िल्म है मिलना बिछड़ना सीन हैं
    आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
    Sandeep Thakur
    26 Likes
    हम अपने दुख को गाने लग गए हैं
    मगर इसमें ज़माने लग गए हैं
    Madan Mohan Danish
    37 Likes
    सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान
    एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान
    Nida Fazli
    47 Likes
    ज़ख़्म है दर्द है दवा भी है
    जैसे जंगल है रास्ता भी है

    यूँ तो वादे हज़ार करता है
    और वो शख्स भूलता भी है

    हम को हर सू नज़र भी रखनी है
    और तेरे पास बैठना भी है

    यूँ भी आता नहीं मुझे रोना
    और मातम की इब्तिदा भी है

    चूमने हैं पसंद के बादल
    शाम होते ही लौटना भी है
    Read Full
    Karan Sahar
    हम तो बचपन में भी अकेले थे
    सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे
    Javed Akhtar
    45 Likes
    हम कुछ ऐसे उसके आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
    बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

    तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंजो-नदामत, तन्हाई
    उसको ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
    Read Full
    Subhan Asad
    32 Likes
    हँसते हँसते निकल पड़े आँसू
    रोते रोते कभी हँसी आई
    Anwar Taban
    34 Likes
    मैं चाहता था मुझसे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे
    लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
    Umair Najmi
    97 Likes
    कोई समंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
    हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

    ताने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
    गले लगा के तुमने हिजरत का दुख बाट लिया होता
    Read Full
    Tehzeeb Hafi
    163 Likes

More by Nida Fazli

As you were reading Shayari by Nida Fazli

    कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया
    हर काम में हमेशा कोई काम रह गया

    छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था
    आग़ाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया

    उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए
    दहशत-गरों के हाथ में इस्लाम रह गया

    उस का क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो
    वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया

    अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स
    गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया
    Read Full
    Nida Fazli
    कोई नहीं है आने वाला फिर भी कोई आने को है
    आते जाते रात और दिन में कुछ तो जी बहलाने को है

    चलो यहाँ से अपनी अपनी शाख़ों पे लौट आए परिंदे
    भूली-बिसरी यादों को फिर तन्हाई दोहराने को है

    दो दरवाज़े एक हवेली आमद रुख़्सत एक पहेली
    कोई जा कर आने को है कोई आ कर जाने को है

    दिन भर का हंगामा सारा शाम ढले फिर बिस्तर प्यारा
    मेरा रस्ता हो या तेरा हर रस्ता घर जाने को है

    आबादी का शोर-शराबा छोड़ के ढूँडो कोई ख़राबा
    तन्हाई फिर शम्अ जला कर कोई हर्फ़ सुनाने को है
    Read Full
    Nida Fazli
    बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
    जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता
    Nida Fazli
    62 Likes
    हर इक रस्ता अँधेरों में घिरा है
    मोहब्बत इक ज़रूरी हादिसा है

    गरजती आँधियाँ ज़ाएअ' हुई हैं
    ज़मीं पे टूट के आँसू गिरा है

    निकल आए किधर मंज़िल की धुन में
    यहाँ तो रास्ता ही रास्ता है

    दुआ के हाथ पत्थर हो गए हैं
    ख़ुदा हर ज़ेहन में टूटा पड़ा है

    तुम्हारा तजरबा शायद अलग हो
    मुझे तो इल्म ने भटका दिया है
    Read Full
    Nida Fazli
    चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं
    घोंसले बन के टूट जाते हैं दाग़ शाख़ों पे चहचहाते हैं

    आने वाले बयाज़ में अपनी जाने वालों के नाम लिखते हैं
    सब ही औरों के ख़ाली कमरों को अपनी अपनी तरह सजाते हैं

    मौत इक वाहिमा है नज़रों का साथ छुटता कहाँ है अपनों का
    जो ज़मीं पर नज़र नहीं आते चाँद तारों में जगमगाते हैं

    ये मुसव्विर अजीब होते हैं आप अपने हबीब होते हैं
    दूसरों की शबाहतें ले कर अपनी तस्वीर ही बनाते हैं

    यूँ ही चलता है कारोबार-ए-जहाँ है ज़रूरी हर एक चीज़ यहाँ
    जिन दरख़्तों में फल नहीं आते वो जलाने के काम आते हैं
    Read Full
    Nida Fazli

Similar Writers

our suggestion based on Nida Fazli

Similar Moods

As you were reading Sad Shayari Shayari