हिज्र सभी गर एक कहानी में मिलते
हम भी किसी तस्वीर पुरानी में मिलते
कोई रंग अगर होता इनका तो फिर
सोचो कितने आँसू पानी में मिलते
ढल जाएगा इक दिन हुस्न तुम्हारा जब
सोचोगे फिर काश जवानी में मिलते
सच में हिज्र बुरा होता तो हम जैसे
आज यहाँ पे नहीं वीरानी में मिलते
— Nirvesh Navodayan















