जितनी ही ज़्यादा ऊँचाई होती है
बाज़ू उतनी गहरी खाई होती है
कुछ जोड़े ऊपर से बन के आते हैं
साथ मिरे हर पल तन्हाई होती है
वो मुझ
में बिल्कुल ऐसे ही है जैसे
इक रामायण में चौपाई होती है
एक दफ़ा लड़की दिल तोड़े फिर देखो
उस के बा'द शदीद पढ़ाई होती है
बा'द बिछड़ के उस से ये जाना हम ने
अच्छा होना एक बुराई होती है
ग़म पी कर आँसू रोके जा सकते हैं
चीख़ छुपाने को शहनाई होती है
— Nirvesh Navodayan















