प्यार किया फिर अभिमान किया
फिर अपना ही नुक़सान किया
सब यादें अंदर दफना लीं
ख़ुद को ही कब्रिस्तान किया
ग़लती ये के उस लड़की को
ना जाना हम ने, जान किया
उस ने छोड़ा गाली दे कर
हम ने आख़िर तक सम्मान किया
यार जुदा हो कर ख़ुश हो गर
जाओ इक और एहसान किया
— Nirvesh Navodayan















