इतना भी मीठा अच्छा नईं
बस चाय रखो रसगुल्ला नईं
उम्मीद रखो लड़के से बस
इश्क़ मुकम्मल पर खर्चा नईं
उस के ख़ातिर ख़ुद को खो देना
मेरी नज़रों में बढ़िया नईं
काँच नहीं दिल हीरा निकला
के चोट लगी, पर टूटा नईं
बोसा दे कर फिर वो लड़की
खाने में कहती, जूठा नईं
गर करना है तो इश्क़ करो
शोना बाबू और बच्चा नईं
कितना अपना लगता है वो
जब बोले, ओये ज़्यादा नईं
— Nirvesh Navodayan















