दरिया से इख़्तिलात है हम रो नहीं रहेरोना हमारी ज़ात है हम रो नहीं रहेकितने दिनों के बा'द ख़ुशी से मिले हैं हमकितनी अजीब बात है हम रो नहीं रहेये दिन भी कोई दिन था जब ख़ुश-गवार दिनये रात कोई रात है हम रो नहीं रहेरोने लगे तो कौन हमें चुप कराएगासो इस की एहतियात है हम रो नहीं रहे— Nivesh sahu