उन सेे नज़रें मिलते ही मौसम सुहाना हो गया

छाए अब्र -ए-तर यूँ फिर दिल शायराना हो गया

क्या सुनाए उन को हाल-ए-दिल जो अपना रहता है
इश्क़ का ये मामला अब तो पुराना हो गया

ख़ामुशी का ये समुंदर गहरा आँखों में रहे
अब तो दर्द-ए-दिल को भी सहते ज़माना हो गया

मतलबी ये सारी दुनिया लगते रिश्ते नक़ली से
ज़िन्दगी का काम बस सब से निभाना हो गया

'प्रीत' का जो मशवरा माना यहाँ सबने अगर
फिर बहाना जीने का हँसना हँसाना हो गया

— Harpreet Kaur

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