
मेरे अपने हर इक पल मेरा दिल नाशाद करते थे
मुझे बर्बाद कर के कहते थे आबाद करते थे
सो मेरे मसअलों ने ज़िंदगी को मौत कर डाला
जो मुझ को जानते थे लाश कह कर याद करते थे
— Pritesh Bunker
Other sher from the same pen
Shers of dil.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling