ye sach hain ki hamne muhabbat nahin ki | ये सच हैं कि हमने मुहब्बत नहीं की

  - Parvez Shaikh

ये सच हैं कि हमने मुहब्बत नहीं की
कभी दिल ने इतनी भी ज़हमत नहीं की

मिला ज़ख़्म अपनों से हम को हमेशा
किसी से कभी भी अदावत नहीं की

करूँँ क्यूँ यक़ीं हर किसी पे मैं अब तो
यक़ीं टूटने पर सख़ावत नहीं की

ये दुनिया हैं इतनी बड़ी कैसे ज़ालिम
मिरा हक़ भी देने की जुरअत नहीं की

सदा सिर्फ़ हमने ख़ुदा को दी परवेज़
वफ़ा की किसी से हिमाक़त नहीं की

  - Parvez Shaikh

Sach Shayari

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