चल रही है ठाकुराई बैठे-बैठे
तोड़ दीं दस चारपाई बैठे-बैठे
तुम तसल्ली से कभी बैठो तो तुम को
देगा सारा सच दिखाई बैठे बैठे
एक दिन बैठक लगी थी भाइयों की
लड़ पड़े भाई से भाई बैठे-बैठे
ओ मसीहा तुझ से कुछ होगा नहीं रे
देते रहना बस दुहाई बैठे-बैठे
अब तुम्हारा कुर्सी पर क़ब्ज़ा है साहिब
अब करोगे तुम कमाई बैठे-बैठे
नेता जी के बेटे की मेहनत तो देखो
कर ली है पूरी पढ़ाई बैठे-बैठे
मज़हबी झगड़े लगाना सीख लो राज़
खा सकोगे तुम मलाई बैठे-बैठे
— Raaz Gurjar















