ग़म से तारी हो रही है
दुनिया सारी हो रही है
ठंड है तो आँख से अब
बर्फ़-बारी हो रही है
जो हमारी हो न पाई
वो तुम्हारी हो रही है
आप ऐसे सूरमा को
जान प्यारी हो रही है
— Raaz Gurjar
दुनिया सारी हो रही है
ठंड है तो आँख से अब
बर्फ़-बारी हो रही है
जो हमारी हो न पाई
वो तुम्हारी हो रही है
आप ऐसे सूरमा को
जान प्यारी हो रही है
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling