kat rahi hai gurbat men zindagi khasaara hai | कट रही है ग़ुर्बत में ज़िंदगी ख़सारा है

  - Rachit Sonkar

कट रही है ग़ुर्बत में ज़िंदगी ख़सारा है
जीतनी थी जो बाज़ी दिल उसे भी हारा है

मुझको देख कर उसने जब रचित पुकारा है
मुझको क्या पता था ये मौत का इशारा है

दिल लगी पड़ी महँगी मुझको इस क़दर देखो
क़ब्र पर मेरी उसने पूरा दिन गुज़ारा है

धूप में वो निकली है शोलो सा बदन ले कर
जल रहा है सूरज भी क्या 'अजब नज़ारा है

दिल के टूटे हिस्से को सीने से हटा कर के
आसमाँ से कह डाला टूटा इक सितारा है

आज उसको आना था वो मगर नहीं आया
इंतज़ार में उसके पूरा दिन गुज़ारा है

अजनबी से जानें क्यूँ अपना दिल लगा बैठे
लग रहा था जाने क्यूँ वो रचित हमारा है

  - Rachit Sonkar

Falak Shayari

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