अश्कों से भर गया है दामन हमारा देखो
अच्छा गुज़र रहा है सावन हमारा देखो
देखा अगर नहीं है ख़ुद को उदास तुमने
तो आओ घर हमारे दर्पन हमारा देखो
तारे जो गिर गए थे अंबर से टूट कर के
उनसे ही हो गया घर रौशन हमारा देखो
पहनी है आज उसने पैरों में अपने पायल
करने लगा है दिल अब छन-छन हमारा देखो
जाने ये किस तरह का बरसा है आज पानी
सूखा हुआ पड़ा है आँगन हमारा देखो
अपने लबों से उसने चूमा तो हमने जाना
गुज़रा है तिश्नगी में बचपन हमारा देखो
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