main kalam se kaaghaz par apna dil banaoonga | मैं कलम से काग़ज़ पर अपना दिल बनाऊँगा

  - Rachit Sonkar

मैं कलम से काग़ज़ पर अपना दिल बनाऊँगा
और फिर तेरा दिल भी मुत्तसिल बनाऊँगा

बैठ कर के साहिल की तपती रेत पर यारों
उँगलियों से इक दरिया मुश्तइल बनाऊँगा

इश्क़ अपने हिस्से का बाँट कर किसी और को
मैं तेरी मोहब्बत को मुन्तक़िल बनाऊँगा

रात दिन तेरी ज़ुल्फ़ें जो हवा में उड़ती हैं
इनको अपने हाथों से मुस्तक़िल बनाऊँगा

हँसते हँसते लोगों को मैं पुरानी ग़ज़लों से
हर किसी को अबकी मैं मुज़्महिल बनाऊँगा

  - Rachit Sonkar

Neend Shayari

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