ज़िंदगी भर कहाँ मज़ा देगीएक मौक़ा मगर क़ज़ा देगीसारी दुनिया मेरे ख़िलाफ़ नहींफिर भी मुमकिन है बद-दुआ देगीआग दिल में लगे या बस्ती मेंसब को जलने का मशवरा देगीरात का दिल दुखेगा ऐसे मेंरौशनी जब भी मुस्कुरा देगीआसमाँ पर कोई ज़मीन नहींये ज़मीन आसमाँ को क्या देगीमैं भी सहरा की सम्त भागूँगाजब भी आवारगी सदा देगी— ARahman Ansari