जीत हो या हो हार क्या करना
फ़ालतू का प्रचार क्या करना
जब प्रतिष्ठा की बात आ जाए
जंग फिर दरकिनार क्या करना
आख़िरी तक प्रयास जारी रख
बोल मत इंतिज़ार क्या करना
सोचना ठीक है तुम्हारा भी
सोचना है तो प्यार क्या करना
प्रेम अव्वल है मान लेते हैं
कौन अव्वल पे रार क्या करना
— Atul K Rai















