धड़कता ही नहीं है अब हमारा दिल उसे कहना

अभी भी जी रहा है पर तेरा "काबिल" उसे कहना

निखारी है बहुत अच्छे से मेरी शा'इरी उस ने
नहीं सजती है मेरे बिन कोई महफ़िल उसे कहना

बहुत मज़बूत मैं ने कर लिया है धोखे खा खा कर
नहीं टूटेगा अब ख़ंजर से भी ये दिल उसे कहना

बिना मतलब ही डरते थे हम उस से दूर होने से
नहीं है उस के बिन ये ज़िन्दगी मुश्किल उसे कहना

समय से नींद आ जाती है हम को कुछ दिनों से अब
नहीं करते सितारे रात में झिलमिल उसे कहना

हमारे साथ था जब तक भरे थे उस के बिल हम ने
नया महबूब भरता है हमारे बिल उसे कहना

कहीं गर वो दिखे तुम को तो बस ये काम कर देना
मरा तो ख़ुद हूँ मैं लेकिन मेरा क़ातिल उसे कहना

नया महबूब उस को मिल गया है तुम से भी अच्छा
बहुत अच्छे से रहता है तेरा "काबिल" उसे कहना

— Raja Singh 'Kaabil'

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