देख ले यार ये भी हम कर तो सकते हैं
दोनों गले मिल कर भी जुदा हो सकते हैं
नम कर सकते हैं रिश्ते की चादर को
आँसू दाग़-ए-गुनाह नहीं धो सकते हैं
उस को दिलासे की उम्मीद है हम से और
हम ऐसे हैं कि दुख सुन कर रो सकते हैं
दीवाने हैं हम सो हमें दो दर्द और ग़म
अहल-ए-हवस ये बोझ कहाँ ढो सकते हैं
नींद से पहले देख लिए हों जिन ने ख़्वाब
ख़्वाब की ख़ातिर वो कैसे सो सकते हैं
बच्चों की मानिंद हैं अपनी दुनिया में
हाथ न पकड़े कोई तो हम खो सकते हैं
दिल की ज़मीं ज़रख़ेज़ नहीं आँखों की है
आप उम्मीद के बीज इस में बो सकते हैं
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















