
समुंदर के बहुत नज़दीक आ कर हम भी देखेंगे
किसी पर्दा-नशीं से दिल लगाकर हम भी देखेंगे
मुहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं तो नइँ सही लेकिन
चलो इक बार क़िस्मत आज़माकर हम भी देखेंगे
— Rakesh Mahadiuree
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