फंकी ज़हर की मार गए हम
कब जीते थे जो हार गए हम
चलना मुश्किल कश्ती का था
जिस दर्या के पार गए हम
जन्नत की मन्नत कर ज़ाहिद
दर्द-ए-दिल ले नार गए हम
हाए दुनिया हाए क़िस्मत
करते करते यार गए हम
आँखों में इक नक़्श छुपाया
बाक़ी ले के ग़ार गए हम
इस दुनिया से कब के रौशन
हो के जूँ तूँ ख़्वार गए हम
— Raushan miyaa'n















