saamne ham ghaur se usko bhala kab dekhte hain | सामने हम ग़ौर से उसको भला कब देखते हैं

  - Rishi Vishwakarma

सामने हम ग़ौर से उसको भला कब देखते हैं
फ़ोन में तस्वीर है तस्वीर तो सब देखते हैं

एक वो है जो कि हर मन्दिर में मन्नत माँगती है
एक हम है जो कि उस लड़की में ही रब देखते हैं

अपने हाथों की लकीरें ख़ूब भाती हैं हमें फिर
साथ में चलते हुए हम उसको जब जब देखते हैं

तंग होकर रोज़ दुनिया जिस ख़ुदा को कोसती है
हम हमेशा मुस्कुराकर उसके करतब देखते हैं

कुछ दिनों में पेड़ पौधे फूल भी बँटते दिखेंगे
आजकल रंगों में भी कुछ लोग मज़हब देखते हैं

  - Rishi Vishwakarma

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