तेरी फ़ितरत भी पहली की तरह है

वो बारिश थी तू बिजली की तरह है

मोहब्बत है अगर आकाश जैसा
तो मज़हब एक सुपली की तरह है

कोई सीने पे सर रक्खा हो जैसे
मोहब्बत उस तसल्ली की तरह है

किसी दिन जान ले लेगी ये मेरी
तेरी मुस्कान हँसली की तरह है

तेरा दिल है अगर संसद भवन तो
ये मेरा दिल भी दिल्ली की तरह है

— Saarthi Baidyanath

More by Saarthi Baidyanath

Other ghazal from the same pen

See all from Saarthi Baidyanath →

Muskurahat Shayari

Shers of muskurahat.

All Muskurahat Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling