तेरी उम्मीद में जीता रहा हूँ मैंतेरी उम्मीद में मरना पड़ा मुझ कोविशाल-ए-यार के दिन थे मगर फिर भीमिलन की रात में डरना पड़ा मुझ को— Sabir Pathan