क़सम ख़ुदा की लगे है ऐसा तुम्हारा आना तुम्हारा जाना
फ़क़त हो जैसे गुमाँ हमारा तुम्हारा आना तुम्हारा जाना
सनम ने पूछा बताओ जल्दी हयात क्या है ममात क्या है
बिला-तक़ल्लुफ़ ज़बाँ से निकला तुम्हारा आना तुम्हारा जाना
कोई तुम्हारी निगह में उलझा किसी को भाए तुम्हारे गेसू
मगर मुझे बस पसंद आया तुम्हारा आना तुम्हारा जाना
जो शख़्स तुम से ये कह रहा है यहाँ प बैठो क़रीब आ कर
कभी न कहता जो देख लेता तुम्हारा आना तुम्हारा जाना
— Safar















