मेरा बेकार गया तुम से शिकायत करना
मैं चली जाऊँगी तब मुझ से मुहब्बत करना
मैं ने चाहा था के हम साथ दिखें मंडप में
देखना पड़ गया उस शख़्स को रुख़्सत करना
ख़ुद को मैं देखता हूँ रोज़ तिरी नज़रों से
ख़ुद से आसान नहीं होता है नफ़रत करना
मैं सिखाता हूँ किसी दिल में जगह कैसे हो
आप सिखला रही है दिल पे हुकूमत करना
ग़म किसी का भी हो मैं अपना बना लेता हूँ
मुझ को कब आएगा इस चीज़ से हिजरत करना
मैं ने माना के ग़लत थी मैं मगर अब लेकिन
तुम को मेरी है क़सम कुछ भी ग़लत मत करना
मैं ने कोशिश भी नहीं की थी कभी जीने की
कम से कम तुम तो यहाँ जीने की हिम्मत करना















