तो क्या हुआ जो कोई मिरे साथ नहीं है
सब ठीक है डरने कि मगर बात नहीं है
बे मन से अगर जा रहे हो मिलने उसे तुम
सागर ये समझलो वो मुलाक़ात नहीं है
नाराज़ हूँ मैं ख़ुद से ख़फ़ा तुझ से नहीं हूँ
गर हूँ ख़फ़ा इतनी भी बड़ी बात नहीं है
हर आग को अपनाने लगूँ अपना कहूँ मैं
इतनी भी मिरी ज़िंदगी में रात नहीं है
माना के नहीं थी तू मिरे क़त्ल में शामिल
कह दे तू मुझे इस में तिरा हाथ नहीं है
बस ढोंग दिखाएँगे उदासी का तुम्हें लोग
तकलीफ़ दिखा पाए ये औक़ात नहीं है
करते ही रहें मिन्नतें फ़ेहरिस्त की तुम से
इतने बुरे भी अपने ये हालात नहीं है
— Sagar Sahab Badayuni















