charaagon se saba ki tum rawaani yaar mat poochho | चराग़ों से सबा की तुम रवानी यार मत पूछो

  - Sandeep dabral 'sendy'

चराग़ों से सबा की तुम रवानी यार मत पूछो
तवाइफ़ से यहाँ उसकी जवानी यार मत पूछो

मुलाज़िम एक सरकारी मुहब्बत ले गया याँ सो
अलम जानो हमारा और कहानी यार मत पूछो

पुराने ज़ख़्म सुनते ही हो जाते हैं तर-ओ-ताज़ा
सो सब कुछ पूछो पर बातें पुरानी यार मत पूछो

हर इक की नज़रों में रहता है ये दिल का ख़ज़ाना याँ
सरल नइँ है हिफ़ाज़त पासबानी यार मत पूछो

ग़ज़लगोई है कारोबार केवल याँ ख़यालों का
फ़क़त ग़ज़लें सुनो 'इल्म-ए-म'आनी यार मत पूछो

  - Sandeep dabral 'sendy'

Bhai Shayari

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