main yahaañ aa ke hooñ dekh be-dam | मैं यहाँ आ के हूँ देख बे-दम

  - Sandeep dabral 'sendy'

मैं यहाँ आ के हूँ देख बे-दम
हूँ न मैं ज़ी-नफ़स हूँ मरे सम

जिस पे जाने से सब रोकते थे
अब उसी राह पर चल पड़े हम

था सुना जो नहीं ऐसा कुछ भी
कौन से लोक में आ गये हम

शाद नाराज़ है इस-क़दर यार
साथ मेरे यहाँ चल रहे ग़म

ग़ैर चारों तरफ़ हैं यहाँ देख
अपने मुझको नज़र आ रहे कम

ठंड से पूस की रात में देख
अब मेरे हाथ और पा रहे जम

भूख से मर रहे सब तड़प के
अब मेरी आँखों में छा रहे तम

गाँव को छोड़ना है सरल पर
शहर में तो निकल अब रहे दम

यार 'सैंडी' मुझे गाँव पहुँचा
पास मुझको नज़र आ रहे यम

  - Sandeep dabral 'sendy'

Gaon Shayari

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