तिफ़्ल थे जब हम हमारे दिल पे इतने पर्दे नइँ थे
याँ सभी कुछ था मगर चेहरे पे इतने चेहरे नइँ थे
नौकरी से पहले बिल्कुल मामला था याँ बराबर
वो भी इतने महँगे नइँ थे हम भी इतने सस्ते नहँ थे
तान के सीना चला करते थे हम भी याँ सर-ए-रह
काँधे ज़िम्मेदारियों के जब हमारे बस्ते नइँ थे
हम कहीं भी आया जाया करते थे बे-फ़िक्र हो के
कमसिनी के वक़्त तो नज़रों के इतने पहरे नइँ थे
आज छोटी-छोटी बातों से आ जाती हैं दरारें
बालपन में दोस्ती के रस्ते इतने कच्चे नइँ थे
रंज है बेहद किसी ने थोड़ी कोशिश भी नहीं की
ज़ख़्म हल्के-हल्के ही थे सारे इतने गहरे नइँ थे
हम बड़ी संजीदगी से पेश आते थे सभी को
हिज्र में पागल हुए हैं क़ब्ल ऐसे हँसते नइँ थे















