
इस-क़दर खा बैठी तन्हाई जवानी याँ हमारी
सिर्फ़ दो मिसरों में ही सिमटी कहानी याँ हमारी
गुल भी मुरझा जाते हैं अब देख के चेहरा हमारा
देख डरता था कभी सागर रवानी याँ हमारी
— Sandeep dabral 'sendy'
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